प्रजातंत्र का अर्थहीन सत्य !

प्रजातंत्र का अर्थहीन सत्य !


प्रजातंत्र के नाम पर गरीब, भूखे, लाचार, मासूम , Corona से पीड़ित जनता को बेवकूफ/मुर्ख/उल्लू बना कर उनसे ही tax वसूल कर, राष्ट्र  की मूल्यवान संपदा को बेच कर अर्जित पैसों से उनपर राज करना (राजा की तरह करोड़ों की car/Plane और आलीशान महलों में रहते हुए) और एशोआराम से जीवन यापन करना.. 


बहुत ही शर्मनाक सोच जो फ्रांस की तरह देश को एक बहुत बड़ी क्रांति की ओर ले जा रहा है जिसका परिणाम सारे पथभ्रष्ट नेताओं को पता ही होगा...


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    जिंदगी एक सफ़र...


जिंदगी एक नोटबुक की तरह जिसके ..

1st Page (जन्म) ...

और 

Last Page(मृत्यु) ...

ईश्वर के द्वारा लिखी जाती है और बाकी पन्ने हमखुद लिखते हैं....,

अतः यह हमपर निर्भर करता है कि हमलोग उसमें कैसे (गंदा या अच्छा) और क्या लिखें !.........

अच्छे कर्म करते जाएं और जीवन को सुनहरे पल में बदलते हुए नई पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शक बने...


वर्तमान प्रजातंत्र एक मिथ्या ..


माननीय के भ्रष्टाचाररोधी वक्तव्य सुन कर बहुत ही प्रसन्नता होती है लेकिन कभी भी किसी सरकार ने इसपर action नहीं लिया ? 

क्योंकी सभी एक ही थैली के चट्टे -बट्टे हैं ..

अगर आपके intentions सही हैं तो prove करें और किसी भी नेता/MLA/MP पर यदि भ्रष्टाचार का कोई आरोप भी हो तो जब तक उसे court से न्याय न मिल जाय तब तक वह चुनाव नहीं लड़ सकता और किसी भी पद पर नहीं रह सकता है..

अगर किसी भी पार्टी के नेता को court भ्रष्टाचारी घोषित कर देता है तो वह नेता और उसकी पार्टी दोनों पर हमेशा के लिए election लड़ने पर रोक लगाने का कानून बना दिया जाए...

और यही कानून उन भ्रष्ट कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी लागू हो जो घूस लेने को अपना धर्म बना चुके हैं..


प्रजातंत्र में पुलिस और प्रशासन का जंगलराज ...


सम्पूर्ण भारतवर्ष पुलिस और प्रशासन के अनियंत्रित व्यवहार इससे त्रस्त है .....

सोच बदलने की जरुरत है ....पुलिस( IPS Officer) और प्रशासन (IAS Officer) हमारे सेवक है न की शासक...

प्रजातंत्र में इनकी सच्ची और सार्थक सेवा की बहुत ही आवश्यकता है लेकिन सरकार इनका दृपयोग अपने फायदे के लिए करती है..

अगर सार्थक प्रजातांत्रिक व्यवस्था होती तो हमारे संविधान के अनुसार पूरी प्रशासनिक व्यवस्था निम्न तीन भागों में बंटी होती और कोई भी एक दूसरे को dominant नहीं करता लेकिन नेताओं ने अपने फायदे के लिए सारी  व्यवस्था को ही हैक कर लिया...


संविधान में सुधार की ज़रूरत..


विधायिका...

इसके अंदर चुने हुए जनप्रतिनिधि और जनता का मत आता और इस आधार पर ही आगे की planning की जाती..

ज़रूरत पड़ने पर कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकारी पर 75% सदन के वोट के आधार पर ही action लिया जाता..

इससे सभी चुने हुए जनप्रतिनिधियों का महत्व भी होता और सरकार कभी भी निरंकुश नहीं होती...

मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री तथा सभी मंत्रियों के चुनाव भी सदन में 75% vote के आधार पर ही होता...

Election 5 साल में एक बार ही होता जिससे आम जनता के पैसे और समय दोनों बचता...

चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी को सदन में जाने का सवाल ही नहीं था तो उनको चुनकर जनता को बेवकूफ बनाना बंद हो जाता...


कार्यपालिका...

सभी Officer (IAS/IPS/ Army/Navy/Air force other Arm forces के) स्वतंत्र होते और अपनी duty बिना किसी बाहरी दबाव के करते लेकिन उनकी salary, promotion , suspension और बर्खास्तकी के लिए आम जनता की online feeding व्यवस्था होती...

और सदन में 75% जनप्रतिनिधियों के vote के आधार पर भी action लिया जा सकता ...


न्यायपालिका

इसके अंदर में सभी investigation agencies (Detective, Vigilance,CID,CBI,RAW,CAG,ED) हो और police केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हो crime के investigation के लिए detective level के officer हो जो court में police का पक्ष रखे और police पर indirectaly उनका control हो..


Police Administration..

 यह department पूरी तरह से स्वतन्त  हो और अक्षरशः संविधान का पालन करे...

पूरे देश की police को एक करके उन्हें एक सूत्र में बांधा जाय और CISF,CRPF उनके control में हो उनकी trainning को Army से clear करने पर ही joining दिया जाय...


Election Commission..

इसमें सबसे ज्यादा सुधार की ज़रूरत है... यह स्वतंत्र हो और block level से लेकर central level तक इसके अपने officers हो... 

Election की घोषणा होने पर election से संबंधित सारे अधिकार इन अधिकारियों के पास आ जाय और सरकार को भंग कर दिया जाय...

पूरे देश में e - Voting की व्यवस्था हो जिससे law & order की situation भी control में रहेगी....

और e - Voting की व्यवस्था जब कोई नया कानून या सरकार के द्वारा कोई नया decesion लिया जा रहा हो उस समय  भी हो जो election commission के द्वारा ही सम्पादित हो...

पार्टीगत व्यवस्था का अंत हो और देश 100% चुने हुए जनप्रतिनिधियों की development की सोच पर आगे बढ़े न की चुनाव जीतने की politics पर...


Education System...

सम्पूर्ण देश में एक ही education system हो जैसे Nursery से Class 12th तक CBSE की education system हो...

और College level की education UGC के द्वारा एक ही syllabus पर आधारित हो..

इनके books और dress.. central level पर decide किए जाए जो सार्वानिक उपलब्ध हो...

Exams लेने के लिए अलग department हो जिसका केवल एक ही काम हो exam लेना और degree देना...


Army/Navy/Air force/BSF& other Border forces...

ये सारे forces एक command के अंदर स्वतन्त्र रूप से काम करे और इनका मुख्य उद्देश्य हो देश की आंतरिक और बाहरी आक्रमण से सुरक्षा...

सभी सुरक्षा agencies मिलकर काम करें और एक दुसरे के सहयोग की भावना हो न की विरोध का ...

किसी भी department(Arm forces, Education, Medical, Administration, Judicial) का officer सभी का officer होगा और उसको अपने ही department के जैसा respect मिलनी चाहिए... काम भले department wise हो....

Medical Department...

 सम्पूर्ण देश की medical system एक और स्वतन्त हो और वह central level पर command हो जैसे police system....

Hospitals गांव level से शुरू होकर 

block  में Medical College, 

Town में IIMS college,

District में IIMS college, 

State capital में IIMS college 

और Central  में IIMS college तक एक chain के रूप में हो...


Taxes...

प्रजातांत्रिक देश में आज भी आम लोग ऐसे रहते हैं जैसे वे गुलाम हैं क्योंकि आज भी गरीब जनता से tax वसूला जाता है जैसे अंग्रेज वसूलते थें....

स्वतन्त्र देश में Tax नाम का कोई word होना ही नहीं चाहिए, केवल और केवल donation (दान) होना चाहिए और वह भी आम जनता अपनी इच्छा अनुसार सरकार के काम के आधार पर दे ... जैसे पार्टियां मांगती हैं...

कानून व्यवस्था...

देश के सभी नागरिक समान हो, किसी को भी कोई extra सुविधा नहीं मिलनी चाहिए....

अगर सरकार कुछ देना चाहती है तो सब को एक समान देगी...

प्रत्येक नागरिक को Job, Medical facilities, Electricity, Education और घर देना जरुरी होगा...

प्रत्येक नागरिक को bank से minimum 10 lakh का credit मिलना जरुरी होगा, जिसकी granter सरकार होगी...

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